Thursday, August 4, 2011

PUNJABIAT

Some times I do wonder

Why we love at all

Isn’t evil

Its infinite recluse

your hope

Never belies


My tears

primrose

I feel you

where

I pulsate hard

लफ़्ज़ मेरे
कह नहीं पाते
दिल की आवाज़
तुम भी नहीं
सुन सकते
दोनों की
अपनी-अपनी
मज़बूरियाँ हैं
पास होने पर भी
शायद इसलिए
रहती दूरियाँ हैं
बोल कुछ
अनकहे
क्यूँ नहीं
हम समझ पाते
या फिर कहीं
जानकर भी
अनजान बने रहते
अपने ही
ख़यालों में खोए
आवारा बादल की तरह
अपने ही आकाश में
भटकते रहते
एक गहरी बदली
बन कर
क्यूँ नहीं हम भी
कुछ पल के लिए
बरस पाते

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